• Q. कर्नाटक युद्धों में प्रभुता के लिए संघर्ष में अंग्रेजों के सफलता के क्‍या कारण थे? कर्नाटक के युद्ध ब्रिटिश के लिए वरदान कैसे साबित हुए?

    उत्तर - दक्षिण भारत के कर्नाटक में व्‍यापारिक अधिकार और औपनिवेशिक साम्राज्‍य की स्‍थापना को लेकर अंग्रेजी और फ्रांसीसी कम्‍पनियों के मध्‍य 1744-1763 तक तीन युद्ध हुये। कर्नाटक में सर्वोच्‍यता प्राप्ति के लिए हुये इन युद्धों में निर्णायक विजय अंग्रेजी ईस्‍ट इण्डिया कम्‍पनी को मिली। 1760 में वाण्‍डीवाश के युद्ध में अंग्रेजों ने प्रत्‍येक दृष्टि से अपनी श्रेष्‍ठता सिद्ध की। 1763 में पेरिस में हुई सन्धि ने राजनीतिक दृष्टि से फ्रांस के भाग्‍य के द्वार भारत में बंद कर दिये। अंग्रेजों की सफलता के प्रमुख कारण निम्‍नलिखित थे-

    1अंग्रेजों की सफलता का प्रमुख कारण समुद्र पर उनका नियन्‍त्रण था। अंग्रेजों के सुदृढ़ जहाजी बेड़े के समक्ष फ्रांसीसी नाविक शक्ति कमजोर पड़ती थी।

    2.           अंग्रेजी कम्‍पनी व्‍यापारिक एवं आर्थिक दृष्टि से समृद्ध थी। अंग्रेजों के पास व्‍यापार के लिए दक्षिण में मद्रास, पश्चिम में बम्‍बई और पूर्व में कलकत्ता का समुद्र तट था। जबकि फ्रांसीसी कम्‍पनी का शक्ति केन्‍द्र दक्षिण में पाण्डिचेरी था जो न तो समृद्ध था और न ही सामरिक दृष्टि से उपयुक्‍त था।

    3.     अंग्रेजी ईस्‍ट इण्डिया कम्‍पनी एक गैर सरकारी संस्‍था थी। कम्‍पनी पर इंग्‍लैण्‍ड की सरकार का नहीं अपितु प्रोपराइटर्स और डायरेक्‍टर्स का नियन्‍त्रण था। कम्‍पनी की समृद्धि पर ही उसके प्रोपराइटर्स, डायरेक्‍टर्स, की समृद्धि और भारत के कर्मचारियों की नौकरी निर्भर थी अत: वे कम्‍पनी के हित में समर्पण भाव से कार्य करते थे। इसकी तुलना में फ्रांसीसी कम्‍पनी राज्‍य  संरक्षित अर्थात् सरकारी थी जिसका रूख अपने कर्मचारियों के प्रति उदासीनता का था। कम्‍पनी को सरकार से निश्चित लाभांश मिलता था अत: उसके कर्मचारियों में समर्पण भावना का अभाव था।

    4. यूरोप में आंग्‍ल-फ्रांस युद्धों में सामान्‍यत: अंग्रेजों का पलडा भारी होता था और इसका मनौवैज्ञानिक लाभ अंग्रेजों को भारत में मिलता था।

    5. अंग्रेजों की सेना फ्रांसीसियों की तुलना में अधिक अनुशासनबद्ध, प्रशिक्षित तथा हथियारों से सुसज्जित रहती थी। अंग्रेजी तटीय प्रदेशों में दृढ़ मोर्चाबन्‍दी तथा सुदृढ़ नौ सेना के बन्‍दोबस्‍त अंग्रेजी कम्‍पनी की सफलता के कारण बने।

    6. फ्रांसीसी सेनापतियों में कभी मतैक्‍य नहीं रहा। अंग्रेजी सेनापतियों में ऐसी कमजोरी नहीं थी।

         वी.ए. स्मिथ ने लिखा है, ''चाहे अलेक्‍जेण्‍डर महान हो या नेपोलियन, कोई भी पाण्डिचेरी को आधार बनाकर वहाँ से चलने तथा बंगाल और समुद्र पर आधिपत्‍य रखने वाली शक्ति से संघर्ष करके भारत का साम्राज्‍य नहीं जीत सकता था।''

         निष्‍कर्षत: यह कहा जा सकता है समस्‍त अच्‍छे संयोग और परिस्थितियाँ अंग्रेजों के पक्ष में थी जिन्‍होंने अंग्रेजों की विजय सुनिश्चित की। फ्रांसीसी सेनापति डूप्‍ले पांडिचेरी में बैठकर मद्रास को जीतने और फिर भारत पर आधिपत्‍य स्‍थापित करने के स्‍वप्‍न देख रहा था। जबकि अंग्रेजी सेनापति क्‍लाइव ने ऐसा बंगाल में किया अत: वह सफल हुआ क्‍योंकि यह एक अच्‍छा चुनाव था।

         एक प्रश्‍न यह भी है कि कर्नाटक के युद्ध ब्रिटिशों के लिए वरदान क्‍यों सिद्ध हुये।

    1. कर्नाटक युद्धों में फ्रांसीसियों की पराजय ने भारतीय सागरों पर ब्रिटेन का निर्विवाद आधिपत्‍य स्‍थापित किया। कई शताब्दियों से चली आरही आंग्‍ल-फ्रांसीसी प्रतिद्वंदिता का भारत में अंत हुआ। अंग्रेज अब निष्‍कंटक व्‍यापार और उपनिवेश निर्माण कर सकते थे।

    2. औपनिवेशिक साम्राज्‍य स्‍थापना की प्रतिद्वंद्विता से फ्रांसीसी बाहर हो गये और भारत में एक व्‍यापारिक कम्‍पनी मात्र बन कर रह गये। अत: अंग्रेजी कम्‍पनी अपना पूरा ध्‍यान भारत की विजय में लगा सकती थी।

    3. प्‍लासी और उसके पश्‍चात् कर्नाटक युद्धों में सफलता प्राप्‍त करने से अंग्रेज व्‍यापारियों का विजेता जाति में रूपांतरण हो गया। 1764 के बक्‍सर युद्ध में विजय ने प्‍लासी के युद्ध को पूर्ण किया। अब भारत में उन्‍हें चुनौती देने लायक कोई नहीं था।

    4. भारतीय शासकों ने व्‍यक्तिगत महत्‍वाकांक्षा से प्रेरित होकर अपने प्रतिद्वंदियों से निपटने के लिए विदेशी शक्तियों की मदद ली। फांसीसियों की पराजय के बाद अब अंग्रेजी कम्‍पनी को भारतीय शासकों की पारस्‍परिक ईर्ष्‍या और झगड़ों का लाभ उठाकर उनके राज्‍यों के आन्‍तरिक मामलों में हस्‍तक्षेप करने और साम्राज्‍य विस्‍तार के भरपूर अवसर प्राप्‍त हुये।

    5. कर्नाटक युद्धों में अंग्रेजों की सफलता ने यह सिद्ध कर दिया कि युद्ध में संख्‍या की अपेक्षा प्रशिक्षण, अनुशासन और आधुनिकतम शस्‍त्रों का प्रयोग अधिक महत्‍वपूर्ण होता है।

    6. भारतीय सैनिक अच्‍छा वेतन लेकर किसी के भी पक्ष में लड़ने को तैयार थे अत: अंग्रेजों ने भारतीयों को सेना में नियुक्तियाँ देकर उन्‍हें प्रशिक्षित किया और उनका उपयोग भारतीय क्षेत्रों को अधीन करने में किया।

    7. बंगाल के बाद अब कर्नाटक पर अंग्रेजों का आधिपत्‍य हो गया अत: आर्थिक शोषण की गति तीव्र हुयी।

    8. पूँजी के संचय ने वाणिज्‍यवाद को जन्‍म दिया तथा कृषि, उद्योग और व्‍यापार को प्रभावित किया। अंग्रेजी कम्‍पनी की वाणिज्यिक नीति का विस्‍तार हुआ। भारत में एकत्रित राजस्‍व ने इंग्‍लैण्‍ड में औद्योगिक क्रान्ति का मार्ग प्रशस्‍त किया। कृषि के व्‍यावसायिकरण ने इंग्‍लैण्‍ड के उद्योगों को कच्‍चे माल के रूप में संजीवनी प्रदान की। 

     

      निष्‍कर्षत: कहा जा सकता है कि ईस्‍ट इण्डिया कम्‍पनी की क्षेत्रीय महत्‍वाकांक्षाएँ और राजनीतिक आधिपत्‍य स्‍थापित करने के जो स्‍वप्‍न देखे गये थे, उन्‍हें पूरा करने का वरदान परिस्थितियों और संयोगों के कारण प्राप्‍त हुआ।

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