• Q. ‘‘प्लासी के युद्ध के पश्चात् भारत ने किस प्रकार मध्य युग से आधुनिक युग में प्रवेश किया’’

    उत्तर- औरगंजेब की मृत्यु के पश्चात् मुगल साम्राज्य के पतन की प्रक्रिया तीव्र हुई। अनेक स्वतन्त्र नये राज्यों का निर्माण हुआ। केन्द्रीय सत्ता की दुर्बलता का लाभ उठाकर विदेशी शक्तियाँ, भारत में मराठे, निजाम, मैसूर और व्यापार के लिए आयी यूरोपीय कम्पनियों ने तात्कालिक राजनीतिक शून्यता को भरने के प्रयास किये। 

                व्यापारिक विस्तार के दौर में अंग्रेजों ने बंगाल के महत्व को पहचान लिया था। कलकत्ता को बसाना, फोर्ट विलियम प्रेसीडेन्सी की स्थापना करना और मुगल बादशाह से मुक्त व्यापार का फरमान प्राप्त करना अंग्रेजों की सुनियोजित और सुविचारित नीति का परिणाम था।

                बंगाल का नवाब सिराजुद्दौला अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता की किलेबन्दी करना और शाही फरमान द्वारा प्राप्त व्यापारिक सुविधाओं के दुरूपयोग को लेकर अंग्रेजी कम्पनी से नाराज था परन्तु अंग्रेज कम्पनी बंगाल में मुक्त व्यापार के अधिकार को छोड़ना नहीं चाहती थी। इन परिस्थितियों में अंग्रेज कम्पनी और नवाब में तनाव इतना बढ़ा कि अंग्रेजों ने कूटनीति और षड़यन्त्र का सहारा लेकर सिराजुद्दौला को बंगाल के नवाब के पद से हटाना चाहा। इसकी अंतिम परिणिती प्लासी के युद्ध में हुयी जिसमें अंग्रेज विजयी हुये।

                यह कहा जाता है कि प्लासी के युद्ध के पश्चात् भारत ने मध्य युग से आधुनिक युग में प्रवेश किया। वास्तव में प्लासी का युद्ध भारत के इतिहास में एक ऐसी घटना थी जिसने ऐसा वातावरण एवं परिस्थितियों का निर्माण किया जिसके कारण युगान्तरकारी परिवर्तनों की शुरूआत हुई।

    1.     1757 के प्लासी के युद्ध से भारत में ब्रिटिश राजनीतिक सत्ता का आरम्भ हुआ। इसके पूर्व तक अंग्रेज कम्पनी भारत में व्यापार करते हुये राजनीतिक शक्ति के रूप में अपनी जगह तलाश रही थी। वह तलाश पूर्ण हुई। एक व्यापारिक शक्ति का रूपान्तरण राजनीतिक शक्ति के रूप में हुआ।

    2.     प्लासी का युद्ध कम्पनी के लिए ही नहीं अपितु समस्त ब्रिटिश जाति के लिए असाधारण महत्व रखता है क्योंकि इस युद्ध के पश्चात् शेष भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार का मार्ग प्रशस्त हुआ। भारत को अपना उपनिवेश बनाने की प्रक्रिया इसी समय से आरम्भ हुयी।

    3.     प्लासी के युद्ध के पूर्व तक अनेक राज्य मुगल सम्राट के नाम से शासन करते थे। प्लासी के युद्ध के द्वारा अंग्रेजों ने मीरजाफर को कठपुतली नवाब बनाकर यह स्पष्ट संकेत दिया कि मुगल शासन का युग समाप्त हो गया है। कम्पनी ने मुगल शासन को राजनीतिक मंच से लगभग विदा कर दिया था। स्वतन्त्र राज्यों का कम्पनी के आश्रित होने की कहानी यही से आरम्भ होती है।

    4.     प्लासी के बाद बंगाल पर अंग्रेजों की सर्वोच्‍यता स्थापित हो गयी। बंगाल के व्यापार और वाणिज्य पर कम्पनी का एकाधिकार स्थापित हो गया। बंगाल के समृद्ध प्रान्त से प्राप्त राजस्व के दम पर ही अंग्रेजों ने शक्तिशाली सेना खड़ी की और न केवल यूरोपीयन प्रतिद्वंदी कम्पनियों अपितु शक्तिशाली भारतीय राजाओं को पदाक्रान्त किया।

    5.     प्लासी की घटना ने मध्ययुगीन भारतीय राजनीति के स्वरूप में परिवर्तन किया। फूट डालो और राज्य करोकी अंग्रेजों की नीति इसी समय आरम्भ हुयी।

    6.     प्लासी के युद्ध से पूर्व अंग्रेजी कम्पनी की पहचान एक महत्वाकांक्षी व्यापारिक कम्पनी की थी। इस युद्ध ने कम्पनी को स्थायी रूप से बंगाल में स्थापित कर दिया। कम्पनी की विजय, विलय और शोषण नीति का यह आरम्भ था।

    7.     प्लासी का युद्ध भारत के इतिहास में ही नहीं अपितु इतिहास लेखन की दृष्टि से भी महान विभाजक रेखा बना। इतिहास लेखन में विभिन्न दृष्टिकोणों की शुरूआत इसी समय से आरम्भ हुयी।

    8.     प्लासी के युद्ध से ही भारत का प्रशासन ऐसी विदेशी शक्ति से नियन्त्रित होना आरम्भ हुआ जो हजारों मील दूर बैठी हुयी थी और भारत के भविष्य का निर्णय लिखने में सक्षम थी।

    9.     आर्थिक रूप से भारत की आर्थिक दरिद्रता इसी समय से आरम्भ होती है। बंगाल संरक्षित राज्य बन जाने से उसका आर्थिक शोषण आरम्भ हुआ। प्लासी के युद्ध और उसके बाद होने वाली लूट से अंग्रेज असीमित साधनों के स्वामी बन गये।

    10.   सामंतीय व्यवस्था का पूँजीवादी व्यवस्था में रूपान्तरण इसी घटना के बाद आरम्भ हुआ।

    11.   कम्पनी क वाणिज्यिक सम्बन्धों के स्वरूप में गुणात्मक परिवर्तन इसी समय से आरम्भ हुआ। कम्पनी ने भारतीय व्यापार और उत्पादन पर एकाधिकार स्थापित करने के लिए बंगाल में अपनी राजनीतिक स्थिति का उपयोग आरम्भ किया।

    12.   टकसाल या सिक्का जारी करना सम्प्रभुता का सूचक होता है। प्लासी के युद्ध के तुरंत बाद कम्पनी ने 1757 में ही कोलकत्ता में टकसाल स्थापित कर एक रूपये का सिक्का जारी किया।

    13.   आधुनिक शब्द नूतनता का द्योतक है। इसी समय से भारत के ढांचागत आर्थिक और सामाजिक परिवर्तनों का आरम्भ हुआ।  

                      1757 की तिथि से ही कम्पनी के शासन का प्रादुर्भाव माना जाता है। इसी दिन से भारत में कम्पनी के शासन की अवधि की गणना की जाती है। प्लासी के युद्ध के परिणाम यह बताते है कि 23 जून 1757 को भारत अपने मध्य युग को त्यागकर आधुनिक युग में प्रवेश करता है।

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